Akshaya/Amla Navami Vrat Katha | आंवला नवमी की व्रत कथा

अक्षय नवमी/ आंवला नवमी का त्योहार दिवाली के 8 दिन बाद होता है. हिंदू शास्त्रों में अक्षय नवमी का बहुत महत्व बताया गया है.

अक्षय नवमी/ आंवला नवमी / कूष्मांडा नवमी की व्रत कथा

काशी नगर में एक नि:संतान धर्मात्मा और दानी वैश्य रहता था. एक दिन वैश्य की पत्नी से एक पड़ोसन बोली यदि तुम किसी पराए बच्चे की बलि भैरव के नाम से चढ़ा दो तुम्हें पुत्र प्राप्त होगा. यह बात जब वैश्य को पता चली तो उससे मना कर दिया लेकिन उसकी पत्नी मौके की तलाश में लगी रही. एक दिन एक कन्या को उसने कुएं में गिराकर भैरो देवता के नाम पर बलि दे दी. इस हत्या का परिणाम विपरीत हुआ. लाभ की बजाय उसके पूरे बदन में कोढ़ हो गया और लड़की की प्रेतात्मा उसे सताने लगी. वैश्य के पूछने पर उसकी पत्नी ने सारी बात बता दी. इस पर वैश्य कहना गोवध, ब्राह्मण वध तथा बाल वध करने वाले के लिए इस संसार में कहीं जगह नहीं है, इसलिए तू गंगातट पर जाकर भगवान का भजन कर गंगा स्नान कर तभी तू इस कष्ट से मुक्ति पा सकती है.

वैश्य की पत्नी गंगा किनारे रहने लगी. कुछ दिन बाद गंगा माता वृद्ध महिला का वेष धारण कर उसके पास आयीं और बोलीं यदि तुम मथुरा जाकर कार्तिक नवमी का व्रत तथा आंवला वृक्ष की परिक्रमा और पूजा करोगी तो ऐसा करने से तेरा यह कोढ़ दूर हो जाएगा. वृद्ध महिला की बात मानकर वैश्य की पत्नी अपने पति से आज्ञा लेकर मथुरा जाकर विधिपूर्वक आंवला का व्रत करने लगी. ऐसा करने से वह भगवान की कृपा से दिव्य शरीर वाली हो गई तथा उसे पुत्र की प्राप्ति भी हुई.

How to do Akshaya/Amla Navami Vrat Katha

अक्षय नवमी/ आंवला नवमी की कथा का पाठ

To get the best result you should do(Akshaya/Amla Navami Vrat Katha) early morning after taking bath and in front of Amla Plant.

Benefits of Akshaya/Amla Navami Vrat Katha

अक्षय नवमी/ आंवला नवमी की कथा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Akshaya/Amla Navami Vrat Katha is the most powerful way to please Lord Krishna and get his blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षय नवमी/ आंवला नवमी की कथा करने से krishna बहुत प्रसन्न होते है और सारे संकट दूर करके जीवन खुशियों से भर देते है ।

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